चिंता मत कर तुझे घर पंहुचा दूंगा – हनुमान जी के चमत्कार की सच्ची घटना

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Bajrangbali Hanumanji ka Chamatkar in Hindi

Bajrangbali Hanumanji ka Chamatkar in Hindi

चिंता मत कर तुझे घर पंहुचा दूंगा – हनुमान जी के चमत्कार की सच्ची घटना

मेरा नाम विवेक राय है, मैं गोरखपुर उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूं, मेरी हनुमान जी में अगाध श्रद्धा है, मैं हनुमान जी की यथासामर्थ्य रोजाना आराधना करता हूं, ठंड के दिनों में रोजाना ना कर पाने की स्थिति में मंगलवार और शनिवार को अवश्य करता हूं। Bajrangbali Hanumanji ka Chamatkar in Hindi

मैंने ग्रेजुएशन एवं पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से की है तथा विश्वविद्यालय के बगल में एक PG में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करता हूं।

यह घटना अप्रैल 2021 की है जब कोरोना वायरस की दूसरी लहर पूरे भारत में अपना कहर मचा रहा था, हम सब डरे हुए थे, PG के संचालक ने सभी छात्रों को अपने कमरे में रहने और अपना बर्तन अपने पास रखने तथा बारी-बारी से खाना लेकर अपने कमरे में ही ले जाकर खाने की हिदायत दे रखी थी। हम सभी छात्र इसका पालन कर रहे थे।

एक दिन PG के मेरे सीनियर अपने एक दोस्त की तबीयत ख़राब होने पर जो कहीं और हॉस्टल में रहता था, उसे अस्पताल ले गए तथा उसके संपर्क में आने से वो कोरोना से संक्रमित हो गए,

अगले दिन यानी 13th अप्रैल 2021 के दोपहर को संयोगवश खाना निकालते हुए वो मुझसे वहीं मिल गए, भूलवश मैंने मास्क नहीं पहना था। थोड़ी देर बातचीत करने के बाद मैं खाना लेकर अपने कमरे में आ गया।

खाना खाने के बाद सब कुछ ठीक रहा पर शाम तक मुझे ज़ुकाम जैसा महसूस होने लगा तो मुझे लगा सामान्य सा सर्दी ज़ुकाम होगा क्योंकि मुझे एलर्जी की समस्या सामान्यतः बनी रहती है, लेकिन रात को खाना खाने के बाद मेरी मांसपेशियों में खिंचाव और दर्द का अनुभव होने लगा तथा ऐसा महसूस हो रहा था कि सूंघने की क्षमता कम होती जा रही है।

मैं थोड़ा चिंतित हो गया, मैंने मेरे फ्लोर के ऊपर रह रहे अपने दोस्त सौरभ को कॉल किया और मेरे कुछ कहने से पहले ही उसने मुझे बता दिया कि वो भईया जो कल अपने दोस्त को अस्पताल ले गए थे वो कोरोना संक्रमित हो गए हैं, उनसे बच कर रहना, अब तो मैं पूरी तरह डर गया, धीरे-धीरे मेरा Body Pain और Muscles में चुभन बढ़ने लगी, मैं सो नहीं पा रहा था रात के 11 बज रहे थे…. मैं अब पूरी तरह आश्वस्त हो गया कि मैं भी संक्रमित हो चुका हूं।

जयेश भईया स्थिति ऐसी थी कि ना मैं सौरभ को अपने पास बुला सकता था ना ही उसके कमरे में जा सकता था। गला भी सूखने जैसा महसूस हो रहा था। मैं पूरी तरह मायूस हो गया कि अब पता नहीं क्या होगा, सोचा घर बता दूं लेकिन अगर बता देता तो पापा मुझे लेने बनारस तो आ जाते पर पापा अस्थमा के मरीज हैं और पापा की उम्र भी 52 वर्ष है, ऐसे में उनकी दिक्कत मुझसे ज्यादा बढ़ जाती।

मैं रोने जैसा हो गया, मुझे कुछ सूझ नहीं रहा था, मैंने सोचा साहस करके कमरे से निकलकर कॉरीडोर में थोड़ा टहलूं लेकिन पैर लड़खड़ाने लगे और चक्कर आने से मैं वहीं बैठ गया, आंखों से आंसू छलक गए।

फिर अचानक मुझे मम्मी की कही एक बात याद आ गई कि जब भी कहीं कभी मुश्किल में पड़ना तो बजरंग बली को याद करना बेटा वो जरूर तेरी रक्षा करेंगे। मैं कमरे में आकर फर्श पर लेट गया और आंखें बंद करके हनुमान चालीसा पढ़ने लगा। Bajrangbali Hanumanji ka Chamatkar in Hindi

मैंने 7-8 बार हनुमान चालीसा पाठ किया तो अचानक मुझे अपने कानों में एक आवाज सुनाई दी की…….”घर पहुंचा दुंगा तू चिंता मत कर”!! उस समय रात के 2 बज रहे थे। मैं उठकर बैठ गया और हाथ जोड़कर हनुमान जी को प्रणाम किया।

ये होने के बाद जयेश भईया मैंने अचानक अपने निष्क्रिय और शिथिल हो रहे शरीर के अंदर ऊर्जा का संचार होते पाया तो मुझे विश्वास हो गया कि यह मेरे आराध्य देव वीर बजरंगी का ही चमत्कार है। हिम्मत करके अपने कुछ कपड़े और किताब जैसे तैसे बैग में रखे और अपने किताबों के बीच से हनुमान चालीसा की छोटी पुस्तिका को उठाकर अपने सीने से लगा कर भोर होने का इंतजार करने लगा।

यह चार घंटे मैंने मन ही मन हनुमान जी का सुमिरन करते हुए बिताए। प्रातः काल 6 बजे मैंने सोचा सौरभ को बुलाऊं वो मुझे रेलवे स्टेशन तक छोड़ दे तो वहां से मैं 7:20 वाली ट्रेन पकड़कर घर को निकल जाऊंगा।

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लेकिन डर रहा था कि कहीं सौरभ मेरी वजह से संक्रमित ना हो जाए, लेकिन मेरे पास कोई और विकल्प नहीं था, मैंने कपड़ा पहना और मास्क लगाया, अपने आपको सेनाटाइस किया, मास्क के ऊपर गमछे से अपना मुंह बांधा,

और ऊपर फ्लोर पर सौरभ को बुलाने के लिए जैसे ही अपने कमरे से बाहर निकला कि मेरे फ्लोर की बॉलकनी में मुझे एक लंगूर के दर्शन हुए जो मुझे बहुत ध्यान से देख रहा था, मैं अब पूरी तरह आश्वस्त हो चुका था कि मेरे बजरंगबली मेरे साथ हैं अब मैं घर पहुंच जाऊंगा। मैंने उस लंगूर को प्रणाम किया और सौरभ के पास गया।

सौरभ मुझे अपनी बाइक से रेलवे स्टेशन छोड़ दिया और टिकट बुक करके मुझे दे दिया, ट्रेन में बैठते ही अपनी छोटी बहन को कॉल किया और उससे बोला- “घर आ रहा हूं!” उसने पूछा क्या हुआ?? ‘ठीक तो हो ना भाई?’ तो मैंने भावुक हो कर कह दिया “हां ठीक हूं जिंदा वापस आऊंगा चिंता मत करो” और फोन रख दिया।

मैं पूरे रास्ते ईयर फोन लगाकर हनुमान चालीसा सुनते हुए 4 घंटे का सफर तय करके गोरखपुर आ गया। स्टेशन से बाहर आकर पापा को फोन किया कि मुझे गांव के लिए बस मिल गई है, लेकिन मुझे कुछ समस्या महसूस हो रही है इसलिए मैं घर आऊं तो आप लोग सावधान रहिएगा और मम्मी को कुछ मत बताना वो घबरा जाएंगी, मुझे कुछ दिनों तक एक कमरे में एकांतवास (isolate) रहना होगा। Bajrangbali Hanumanji ka Chamatkar in Hindi

पापा मेरी बात समझ गए; पापा ने मेरी बहन से बोलकर मेरा कमरा खाली और साफ करा दिया और मैं पूरे रास्ते में बस की खिड़की से तीन चार जगह सड़क के किनारे बने हनुमान जी के छोटे बड़े मंदिरों को प्रणाम करते हुए घर की ओर बढ़ने लगा।

घर पहुंचते ही सीधे अपने कमरे में गया और फर्श पर थक कर चूर होकर लेट गया और लेटकर सोचने लगा कि अगर हनुमान जी का आशीर्वाद साथ नहीं होता तो आज पता नहीं क्या होता, जहां कॉरीडोर में मेरे लिए दो क़दम चलना मुश्किल था, वहां यह 200 किलोमीटर की दूरी कैसे तय पाता।

मैं अपने आराध्य देव वीर-बजरंगी की कृपा से ही उस कठिन परिस्थिति में अपने घर पहुंच पाया। मैं हनुमान जी को यह घटना याद करके बारंबार प्रणाम करता हूं तथा आज मेरी तरह ही हनुमान भक्त जयेश भईया से यह घटना साझा कर रहा हूं।


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