Sankalp ka Chamatkar in Hindi
मेरे संकल्प का मजाक उड़ाया लोगों ने – हनुमानजी के चमत्कार से जुडी सच्ची घटना
मेरा नाम अनीता है मैं पूर्वांचल भारत से हूं, जयेश भाई आपका बहुत धन्यवाद हनुमान जी की कृपा से जुड़े अनुभव हमसे साझा करने के लिए और हमारी आस्था बढ़ाने के लिए, आपके चैनल से जुड़े सभी भक्तों को प्रणाम, मैं बचपन से ही पूजा पाठ में रुचि रखती हूं और शिव जी की भक्त हूं. Sankalp ka Chamatkar in Hindi
यह बात मई 2021 की है, हम एक छोटे से शहर में रहते हैं उस वक्त कोरोना बहुत ज्यादा फैला हुआ था मेरे पापा को 1 दिन बुखार आया और ठीक हो गया हमें लगा सब ठीक है, दो दिन बाद फिर से उन्हें तेज सिर दर्द और स्वाद न मिलने की परेशानियां शुरू हो गई तब हमें लगा कि शायद उन्हें कोरोना हो गया है,
पर हम उन्हें अस्पताल ले जाने से बहुत डर गए थे क्योंकि उस वक्त जान पहचान के बहुत से लोग अस्पताल गए पर वापस नहीं आए और मेरे पापा मानसिक रोगी है, वह अपना ध्यान बिल्कुल नहीं रख पाते, यहां तक की खाना भी खुद मांग कर नहीं खाते थे, इसलिए मेरे घर वालों ने फैसला किया कि हम उन्हें अस्पताल नहीं रख सकते,
और उस वक्त ज्यादातर लोगों को कोरोना पॉजिटिव आने पर हॉस्पिटल में रख दिया जाता था हम जानते हैं कि वह फैसला सही नहीं था और सब से यही प्रार्थना करूंगी कि ऐसा फैसला बिल्कुल ना लें, लेकिन पापा की मानसिक स्थिति को देखते हुए हमें यह फैसला लेना पड़ा,
इसी तरह कुछ दिन बीते और पापा की तबीयत रोज और ज्यादा खराब होती चली गई, तो हमने फैसला किया कि हम गांव चले जाएंगे उस दौरान हमने पूरी तरह सावधानी बरती किसी के कांटेक्ट में ना आए की किसी और को हमारी वजह से कोरोना ना हो जाए, Sankalp ka Chamatkar in Hindi
गांव जाने के बाद उनकी तबीयत और ज्यादा खराब हो गई, उन्होंने धीरे-धीरे खाना पूरी तरह छोड़ दिया पहले तो हम उन्हें खाना लिक्विड फॉर्म में दे रहे थे, बाद में उन्होंने वह भी छोड़ दिया हम कितना भी कहते खिलाने की कोशिश करते वह खाना फेक देते, बीमारी और खाना ना खाने की वजह से वह बहुत ज्यादा कमजोर हो गए थे, इतना की सही से चल भी नहीं पाते थे,
हम सब बहुत डर गए हमें लगा कि शायद हम उन्हें खो देंगे, मैं उन दिनों बहुत रोती थी शिव जी से प्रार्थना करती थी कि किसी तरह उन्हें ठीक कर दे क्योंकि हमारे हाथ में कुछ नहीं था, उन्हें अस्पताल में दिखाना और वहां रखना और घर में रखना दोनों ही उनके लिए हानिकारक महसूस हो रहा था, हमारे पास प्रार्थना के सिवाय कोई रास्ता नहीं बचा था,
मैं भोले बाबा से प्रार्थना करती किसी तरह उन्हें बचा ले, उसी वक्त एक दिन मैंने आपका चैनल देखा उसमें भक्तों के अनुभव देखें ऐसा लगा मानो भोले बाबा बजरंगबली खुद मेरा साथ देने आए है और मैंने पूरे विश्वास के साथ 21 दिन के 21 हनुमान चालीसा के पाठ करने का संकल्प लिया,
फिर मेरी एक दोस्त हैं जो बजरंगबली को बहुत मानती हैं, उनसे इस बारे में बात की तो उन्होंने कहा कि तुम संकल्प जरूर लो बजरंगबली तुम्हारी मदद जरूर करेंगे, पर ध्यान रखना शुरुआत में नकारात्मक शक्तियां तुम्हें रोकने की कोशिश कर सकती हैं और प्रभु का नाम लेकर मैंने संकल्प शुरू किया,
शुरू में मुझे ऐसा लगा मानो कोई शक्ति मुझे रोक रही हो संकल्प लेने से, यहां तक कि मैंने सपने में कुछ लोगों को भी देखा जो मुझे रोकने की कोशिश कर रहे थे, पर मैंने अपना संकल्प जारी रखा इस तरह 10-11 दिन बीत गए पर पापा की तबीयत और ज्यादा खराब होने लग गई अब वह बस पानी पीते थे,
मैं अपने भाई से बार-बार कहती रही कि उन्हें अस्पताल लेकर जाना चाहिए, रोज उनकी तबीयत बहुत ज्यादा खराब होते हुए नहीं देख सकती, मेरे घर वाले भी बहुत दुखी थे पर वह बहुत ज्यादा डरे हुए थे तो उन्होंने मेरी यह बात नहीं मानी,
मेरी मां और परिवार के कुछ लोगों को मेरी आस्था पर पूरा भरोसा था, पर कुछ लोगों ने मेरा बहुत मजाक उड़ाया कहा कि इस संकल्प का कोई मतलब नहीं है कि मैं पढ़ी लिखी होकर भी अंधविश्वास कर रही हूं, पर मुझे पूरा भरोसा था कि बजरंगबली मेरी जरूर सुनेंगे,
मैं बता दूं मैं शाकाहारी हूं लेकिन मेरे घरवाले मांसाहारी, यहां तक कि मेरे संकल्प के दौरान भी मेरे घर में मांसाहार का सेवन किया जा रहा था, मैंने बहुत कोशिश की कि ऐसा ना हो पर जो मेरा मजाक उड़ा रहे थे, उन्होंने मेरी एक न सुनी इसीलिए मैं बस प्रभु से क्षमा मांगती और प्रार्थना करती कि “हे प्रभु मेरी भक्ति का मान रख लो और उन लोगों को क्षमा कर सद्बुद्धि दो,
मेरे संकल्प के 11 दिन बाद की बात है मेरा काफी मजाक उड़ाया गया, मैंने उनसे बस यही कहा कि जिस तरह बजरंगबली लक्ष्मण जी के लिए संजीवनी बूटी लेकर आए थे, उसी तरह वह मेरे पापा के लिए भी संजीवनी लाएंगे, मैं उस दिन भी बहुत रोई क्योंकि मुझे पूरा भरोसा था बजरंगबली पर, पर कोई समझ नहीं रहा था साथ नहीं दिया जा रहा था, बल्कि मजाक उड़ाया जा रहा था,
सोमवार का दिन था उस दिन मैंने बजरंग बाण का भी संकल्प लिया, उस रात मुझे सपने में बजरंगबली की मूर्ति के दर्शन हुए साथ ही एक जगह का नाम देखा जहां बजरंगबली का मंदिर था, सुबह उठकर गूगल में चेक किया तो पता चला वहां सचमुच एक हनुमान जी का मंदिर है, Sankalp ka Chamatkar in Hindi
अगली सुबह जब मैं उठी तो मेरे भैया ने कहा कि हम अस्पताल चलते हैं ये सुनकर मैं चौंक गयी, मैं इतने दिनों से बार-बार कह रही थी रो रही थी, पर वह डर के मारे नहीं जा रहे थे, फिर अचानक वह जाने के लिए तैयार हो गए थे, वह मंगलवार का दिन था मैंने चालीसा और बजरंग बाण दोनों का पाठ किया फिर हम पापा को लेकर अस्पताल गए,
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वह बहुत कमजोर हो चुके थे सही से खड़े भी नहीं हो पाते थे, अब तक उन्हें बुखार आए 25 दिन हो चुके थे, तो हम आशा कर रहे थे कि कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट ना आए, क्योंकि अगर ऐसा होता तो उन्हें हॉस्पिटलाइज कर दिया जाता और वही होता जिसका हमें डर था, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ उन्हें सलाइन दी गई टेस्ट कराए गए और हम दवाइयां लेकर वापस आ गए,
मैं जाते हुए पूरे रास्ते चालीसा का पाठ करते हुए गई थी और टेस्ट के दौरान भी मैं चालीसा का ही पाठ कर रही थी, आते हुए मेरे बड़े भाई ने कहा कि अगर पापा की तबीयत ठीक होती है तो अच्छी बात है वरना हम फिर से अस्पताल नहीं ले जाएंगे,
मैं घर आई और फिर प्रभु से प्रार्थना की, मैं बता दूं कि मैं बजरंगबली को अपना बड़ा भाई मानती हूं, तो मैंने उनसे कहा कि अब कोई मदद नहीं कर सकता प्रभु, अब यह बात हम इंसानों से बहुत आगे हो चुकी है प्लीज मदद कर दीजिए,
और बुधवार सुबह जब हम उठे तो पापा की तबीयत थोड़ी बेहतर थी, उस रात भी मुझे सपने में बजरंगबली की मूर्ति के दर्शन हुए और उस दिन सपने में जिस मूर्ति के दर्शन हुए वह मूर्ति अपने हाथों में पहाड़ लिए हुए थी,
उस रात एक और घटना हुई, मैं आधीआधी नींद में थी, मैंने एक सपना देखा जिसमें किसी ने मुझसे कहा कि मैं शिव जी को मानती हूं या बजरंगबली को, मैंने जवाब दिया दोनों क्योंकि दोनों एक ही है और अचानक उस आधी नींद की अवस्था में मैं पापा की तरफ मुड़ी और देखा कोई साया उनके ऊपर है और उसी अवस्था में पापा के शरीर पर हाथ रख कर मैं हनुमान चालीसा पढ़ने लगी,
जैसे ही मैं चालीसा पढ़ती रही ऐसा लगा वह साया उड़कर दूर चला गया, सपने में संजीवनी के साथ प्रभु के दर्शन और इस घटना के बाद मैं समझ गई कि अब मेरे पापा को कुछ नहीं होगा, पापा की तबीयत पूरी तरह ठीक हो जाएगी और मैंने अपना संकल्प जारी रखा,
और शनिवार सुबह जब मैं पूजा कर वापस आई तो मुझे पता चला कि उन्होंने खुद खीर खाई सोचिए जो इंसान बस पानी पी रहे थे, इतनी कोशिशों के बाद भी खाना नहीं खा रहे थे, उन्होंने खुद अपने हाथों से इतने दिनों बाद कुछ खाया और वह भी शनिवार के दिन बस उसके बाद धीरे-धीरे उनकी तबीयत ठीक होती गई,
बजरंगबली ने ही मेरे पापा के प्राणों की रक्षा की और आज वह बिल्कुल ठीक है हमारे साथ है, मैंने अपना संकल्प पूरा किया और फिर पापा मम्मी दोनों के साथ जो मंदिर मैंने सपने में देख गूगल किया था, उस पंचमुखी बजरंगबली के दर्शन किए, Sankalp ka Chamatkar in Hindi
अब मैं शिव जी के साथ बजरंगबली को भी बहुत मानती हूं शिव जी मेरे पिता है तो बजरंगबली मेरे बड़े भाई, मेरा उन पर अटूट विश्वास है कि वह सदा मेरा साथ देंगे आपके चैनल से जुड़े सभी भक्तों को भी यही कहूंगी कि बजरंगबली पर अपनी आस्था बनाए रखें, वे जीवन के हर मोड़ पर आपकी रक्षा करेंगे,
तो दोस्तों देखा आपने एक और असंभव कार्य संभव किया हमारे बजरंगबलि ने और प्रभु पर अटूट विश्वास ने ये सम्भव कराया, इसलिए कहता हूँ संकल्प हो या व्रत जो भी करो सच्चे दिल और पवित्र मन से करो, आपकी परीक्षा होगी पर उस समय धीरज रखे, प्रभु सब संभाल लेंगे…तो ऐसे ही है हमारे बजरंगबली.
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