Hanumanji ki Kripa Chamatkar in Hindi
हनुमान जी को साक्षी रखकर ये अनुभव लिखा है – बजरंगबली के अद्भुत चमत्कार की सच्ची घटना
दोस्तों आज का अनुभव बिल्कुल अद्भुत है, क्योंकि जब मैंने ये अनुभव पढ़ा तब मेरा दिल भर आया, ये अनुभव पढ़ने के बाद हनुमानजी की महिमा का मैं किस तरह बखान करूं मेरे पास शब्द नहीं है, आप भी यही कहोगे कि ये तो सिर्फ और सिर्फ हमारे बजरंगबली ही कर सकते है, आप बस इस अनुभव को ध्यान से पढिए और हमारे प्रभु की महिमा को समझिये, Hanumanji ki Kripa Chamatkar in Hindi
मेरा नाम सुदीप है और मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले का निवासी हूं, मेरे ग्राम का नाम पटना है, जयेश भाई मैं काफी दिनों से अपना एक अनुभव आपसे शेयर करना चाहता था, पर किसी न किसी कारण से नहीं कर पाया, इस दुनिया में हनुमान जी के बहुत बड़े-बड़े भक्त हुए हैं और आज भी हैं, उन्हीं में से मैं एक छोटा सा उनका दास हूं,
मुझे आज हनुमान जी के शरण में गए करीब 3 साल बीत गए हैं और मैं रोज दोनों समय हनुमान जी के चरणों में अपनी हाजिरी लगाता हूं, जितनी कृपा मुझ पर बजरंगबली की हुई है, मैं उसको शब्दों में बया तो नहीं कर सकता पर एक छोटी सी कृपा प्रभु की जरूर बता सकता हूं,
जयेश भाई यह बात मैं आपको जो बता रहा हूं, अभी मैं सुबह 4:00 बजे प्रभु के मंदिर में उनके समक्ष बैठकर आपको लिख रहा हूं, प्रभु साक्षी है कि मैं किसी तरह का कोई झूठ आप से नही बता रहा,
यह बात वर्ष 2021 अप्रैल की है, जब मेरा आधा परिवार कोरोना से ग्रसित था और मेरी मां जो कि 70 वर्ष की आयु पार कर चुकी है, वह भी कोरोना पॉजिटिव हो गई थी, उनकी उम्र ज्यादा होने के कारण मैं उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती नहीं करा सकता था, क्योंकि वहां किसी तरह की कोई सुविधा नहीं थी और मेरी मां को चलने फिरने में भी दिक्कत थी, Hanumanji ki Kripa Chamatkar in Hindi
इसलिए मैंने यह सोच कर उनका ध्यान घर में ही रखने का निश्चय किया, पर उनका स्वास्थ्य धीरे-धीरे बिगड़ता गया और मैं बजरंगबली से प्रार्थना करता रहा कि “हे प्रभु मेरी मां को घर में ही ठीक कर दो”,
मैं आपको एक बात बताना तो भूल ही गया की मेरी मां की कोरोना रिपोर्ट आने के 1 दिन पहले अचानक मेरे मन मे हनुमान चालीसा के 100 बार पाठ करने की इच्छा जागृत हुई और मैंने उस दिन 100 बार बिना उठे एक ही जगह पर बैठकर लगातार 5 से 6 घंटे तक चालीसा का पाठ किया और उसके दूसरे ही दिन मेरी मां की कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट आ गई,
मुझे पूरा विश्वास था की बजरंगबली की कृपा से मेरी मां की कोरोना रिपोर्ट कभी पॉजिटिव नहीं होगी, पर रिपोर्ट देखकर मैं हैरान रह गया और मेरे मन में ऐसे विचार आने लग गए की मेरे प्रभु ने क्यों मेरा साथ छोड़ दिया,

फिर उन्हें घर में रखकर उनका ध्यान रखने का निश्चय करके प्रभु का नाम लेते हुए मैंने 3 दिन घर में ही अपनी मां का ध्यान रखा, पर उनके स्वास्थ्य में कोई सुधार ना आने के कारण मेरा विश्वास हनुमान जी से डगमगाने लग गया,
मैंने बोला प्रभु आपने मेरा साथ क्यों छोड़ दिया मुझसे क्या गलती हो गई, मैं तो आपके चरणों का दास हूं सदैव आपकी सेवा में किसी न किसी प्रकार से लगा ही रहता हूं और मैं लगातार रोता जा रहा था,
उसी दिन शाम को तबीयत ज्यादा बिगड़ जाने के कारण मुझे मजबूरी में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने ले जाना पड़ा फिर भी मैं अपने हृदय में बजरंगबली को बसा कर चल पड़ा, हॉस्पिटल में जाते ही वहां की हालत देखकर मैं घबरा गया मैंने सोचा कि मेरी मां अच्छे से चल फिर भी नहीं सकती, इन्हें कौन खाना खिलायेगा? कौन पानी पिलाएगा? कौन बाथरूम के लिए ले जाएगा?
ऐसे विचार करके मैं बिल्कुल उदास हो गया और बोला कि मेरे हाथ में कुछ भी नहीं है, हे बजरंगबली अब सब कुछ आपके हाथों में है, आप सब संभाल लेना ऐसा कह कर मैं उनका ध्यान करने लग गया,
फिर प्रभु का नाम लेकर मैं अपनी माँ को भर्ती कराने के लिए लाइन में लग गया, पर इतनी भीड़ होने के कारण और अस्पताल में जगह न होने के कारण डॉक्टर के द्वारा मुझे सुझाव दिया गया कि हमारा एक और कोविड सेंटर है, जो कि यहां से थोड़ी दूरी पर है आप इन्हें वहां भर्ती कराइए, वहां इन्हें ठीक सुविधा मिल जाएगी, ऐसा सुनकर मैं उन्हें वहां लेकर चल दिया,
डॉक्टर के द्वारा बताए गए कोविड सेंटर में जाकर वहां की व्यवस्था देख कर और मरीजों को व्यक्तिगत रूप से कमरा होने पर मेरे मन में आशा की किरण जगी कि अब यहां इलाज अच्छे से हो सकता है, मैंने बजरंगबली का नाम लेकर उन्हें वहां भर्ती कर दिया, Hanumanji ki Kripa Chamatkar in Hindi
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जिस समय मैंने उन्हें भर्ती किया उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं था, पर धीरे-धीरे उसी रात उनका स्वास्थ्य सुधरने लग गया, मैं रात भर जाग कर देखता रहा, उनका स्वास्थ्य धीरे-धीरे सुधर रहा था, सुबह होते ही डॉक्टर आए उन्होंने चेकअप किया और बताया कि धीरे-धीरे सुधार हो रहा है,
उम्र ज्यादा होने के कारण मुझे डर था कि कहीं कुछ अनहोनी ना हो जाए, पर धीरे-धीरे उनके स्वास्थ्य में सुधार आता गया, वहां सबसे बड़ी समस्या थी बाथरूम तक जाने की जो कि काफी दूर था और मेरी माता चलने में सक्षम नहीं थी,
फिर मैंने बजरंगबली से अर्जी लगाई कि, “हे प्रभु अब यहां तक तो ला दिए हैं थोड़ी बहुत मदद और कर दीजिए” और सुबह होते ही वहां दो व्हीलचेयर भेज दिए गए, व्हीलचेयर के द्वारा मैं अपनी मां को बाथरूम तक ले जा पाया,
फिर धीरे-धीरे 4 से 5 दिनों में मेरी मां पूरी तरह स्वस्थ हो गई, जिनके स्वस्थ होने की उम्मीद नहीं थी, डॉक्टर ने भी कहा कि यह कोई चमत्कार है जो कि इस उम्र में इस कंडीशन में इनका स्वास्थ्य इतनी शीघ्र ठीक हो गया,
एक बात और बताना चाहूंगा कि अस्पताल में मरीजों के साथ अटेंडर को रुकने की कोई भी अनुमति नहीं थी, पर मुझे वहां रुकने दिया गया अपनी मां के साथ और मेरे बाद भी और अटेंडर भी अपने परिजनों के साथ वहां रुकने लगे,
जयेश भाई मुझे छोड़कर जितने भी अटेंडर थे सभी पॉजिटिव हो चुके थे, पूरा स्टाफ और डॉक्टर भी आश्चर्यचकित थे कि मैं कैसे पॉजिटिव नहीं हुआ, जबकि मैं अपने हाथों से अपनी मां की सेवा करता था, उन्हें खाना खिलाता था, पानी पिलाता था, दवाई खिलाता था, उनका सर दबाता था, उन्हें बाथरूम तक ले जाता था, सब कुछ मैं ही करता था,
यहां तक की वहां के डॉक्टर और आधे स्टाफ तक पॉजिटिव हो चुके थे, अंत में जब मैं अपनी मां को डिस्चार्ज करके घर ले जाने लगा, तब वहाँ के डॉक्टर ने कहा कि यह तो चमत्कार है, इस उम्र में भी इतनी जल्दी रिकवर करना आसान बात नहीं,
तब मुझे समझ आया कि मेरी मां का ठीक होना और मेरा पॉजिटिव ना होना यह सब मेरे बजरंगबली की ही कृपा थी, जिन्होंने अस्पताल में मेरी सहायता की, मेरी मां को दूसरे कोविड सेंटर में भेजा जहां अच्छी सुविधा थी और मुझे भी बचाए रखा और आज मेरी मां पूरी तरह से स्वस्थ है, Hanumanji ki Kripa Chamatkar in Hindi
इस घटना से मैंने यह अनुभव किया कि प्रभु मेरी परीक्षा ले रहे थे और मैं उनकी परीक्षा में सफल नहीं हो पाया, वह मेरे विश्वास को परख रहे थे, फिर भी उन्होंने मेरी सहायता की जब की मेरा विश्वास उन पर से डगमगा गया था,
जयेश भाई इस घटना से यह सिद्ध होता है कि चाहे कठिनाई कितनी भी हो परेशानी कितनी भी हो अपने इष्ट अपने प्रभु पर से विश्वास कभी नहीं हटाना चाहिए, तब से मेरा विश्वास प्रभु के ऊपर और बढ़ गया जैसा आप कहते हैं, “तो ऐसे ही हैं हमारे बजरंगबली” जी हां बिल्कुल ऐसे ही हैं और इससे भी कहीं ज्यादा कृपा के सागर है, दया निधान जो सब पर कृपा करते हैं, चाहे वह उनका भक्त हो या ना हो,
मैं धन्य हूं जो मैं उनका एक छोटा सा दास हूं, जयेश भाई आप भी बहुत अच्छा काम कर रहे हैं, ऐसे ही बजरंगबली के भक्तों पर उनकी आस्था और प्रगाढ़ होती रहे ऐसी मैं कामना करता हूं और साथ में ही अपने प्रभु की एक तस्वीर भी आपको भेज रहा हूं, Hanumanji ki Kripa Chamatkar in Hindi
तो दोस्तों देखा आपने क्या अद्भुत है हमारे प्रभु की महिमा, इस भक्त ने भी सही कहा कि संकट चाहे कैसा भी हो प्रभु पर अपने विश्वास को टूटने मत दो, हमारे प्रभु बहुत ही दयालु है वे अपने भक्त को कभी दुखी नहीं देख सकते, वे आपकी सहायता जरूर करेंगे….तो ऐसे ही है हमारे बजरंगबली.
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